Monday, 12 December 2011

घर से निकलते ही ऑटो मिलने पर युवक को पड़ा दिल का दौरा, नहीं झेल पाया सदमा

दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन इलाके में रहने वाले 26 वर्षीय सुमित मित्तल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि घर से निकलते ऑटो मिलना उसे इतना महंगा पड़ेगा। सुमित फिलहाल आईपी एक्सटेंशन के ही मैक्स अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।
फ़ेकिंग न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक सुमित नोएडा के सेक्टर 62 में टीसीएस कम्पनी में काम करता है। घर से ऑफिस तक के रास्ते में यूपी-दिल्ली बॉर्डर आने की वजह से उसे कभी सीधा ऑटो नहीं मिलता था। यही वजह थी कि दस बजे का ऑफिस होने के बावजूद वो हर रोज़ आठ बजे घर से निकलता था। घर से निकलने से पहले वो ऑटो वालों से चलने के लिए रिक्वेस्ट करने और पैसे कम करने के लिए खुद को मेंटली प्रिपेयर कर लेता था।
सोमवार सुबह भी ऐसी ही तैयारी के साथ वो घर से निकला। जैसे ही वो सोसाइटी से निकला उसे सामने वाली सड़क से गुज़र रहा एक ऑटो दिखाई दिया। उसने बड़े अनमने तरीके से ‘ओए ऑटो’ की आवाज़ लगाई और हाथ हिलाया।
ये देखकर सुमित हैरत में पड़ गया कि न सिर्फ वो ऑटो वाला रूका बल्कि घुमकर खुद सड़क क्रॉस कर उस तक आया। सुमित के लिए ये बहुत ही चौंकाने वाला था। अमूमन दस में से नौ ऑटो वाले इस तरह की आवाज़ों को अनसुना कर देते थे और जो सुनते थे वो ‘गैस भरवाने जा रहा हूं’ कहकर आगे बढ़ जाते थे। मगर ये पहला था जब आवाज़ देने पर एक ऑटो वाला न सिर्फ रूका बल्कि खुद उसकी तरफ भी आया। मगर सुमित को अब भी उसके चलने के लिए तैयार होने पर शक था। सुमित ने डरते-डरते पूछा, भइया नोएडा चलोगे। जिस पर ऑटो वाले ने पूछा-नोएडा में कंहा?
पिछले दो मिनट में सुमित को मिला ये दूसरा झटका था। पहले तो ऑटो वाला घूम कर आया और अब ये पूछ रहा है…नोएडा में कहां? इसका मतलब ये है कि वो चल सकता है। बिना वक्त गंवाए सुमित ने कहा-सेक्टर 62…ऑटो वाले ने सीट की तरफ इशारा करते हुए कहा-बैठो। इशारा देखकर सुमित की सांसें तेज़-तेज़ चलने लगी। मगर अब भी एक सवाल बाकी था-कितने पैसे लोगे? और इस पर जो ऑटो वाले ने कहा वो राजधानी बनने के सौ सालों के इतिहास में दिल्ली में पहली बार किसी ऑटो वाले ने कहा था-जितने बनते हैं दे देना!
इस पर सुमित ने 80 बोला और ऑटो वाला मान गया। बड़ी मुश्किल से सुमित ने खुद को सम्भाला और ऑटो में बैठ गया। ये खुशी वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। उसे ये सब एक सपने की तरह लग रहा था। हकीकत तो ये थी कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे घर से निकलते ही कभी सीधे ऑफिस जाने के लिए अस्सी रूपये में सीधा ऑटो मिल जाएगा।
तभी उसकी नज़र घड़ी पर पड़ी जिसमें आठ पांच हुए थे। उसके ज़हन में ख्याल आया कि टाइम से ऑफिस पहुंच गया तो रोज़ के मुकाबले घंटा पहले निकल लूंगा। शाम को टाइम से घर आ जाऊंगा। वो अपनी एक्साइटमेंट संभाल नहीं पा रहा था। उसकी हालत कौन बनेगा करोड़पति के उसे प्रतियोगी की तरह हो गई थी जो 80 हज़ार जीतने की सोच कर आया था और 50 लाख जीत चुका था।
दिमाग तरह-तरह के विचारों से भरता जा रहा था। जल्दी ऑफिस पहुंच जाऊंगा, जल्दी निकल लूंगा, शाम को कुछ काम निपटा दूंगा, डर्टी पिक्चर का ईवनिंग शो देखने चला जाऊंगा….इसी तरह की उसने एक-आध बात और सोची तो सांसें तेज़ चलने के साथ-साथ अब उसे पसीना आने लगा। देखते ही देखते उसकी हालत ख़राब होने लगी।
तभी ऑटो ड्राइवर ने सुमित की बिगड़ती हालत देखी तो उसे फौरन नज़दीक के अस्पताल ले गया। जहां वक्त रहते डॉक्टरों ने उसे उपचार देकर उसे बचा लिया। होश में आने पर जब सुमित से पूरी घटना का ब्यौरा सुनने के बाद डॉक्टर इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि वक्त पर ऑटो मिलने का ‘सदमा’ सुमित बर्दाश्त नहीं कर पाया और माइनर हार्ट अटैक का शिकार हो गया।
साथ ही डॉक्टरों ने घरवालों को हिदायत दी है कि सुमित को ये न बताएं कि ऑटो वाला ही उसे अस्पताल लाया था वरना ये सुनकर उसे फिर हार्ट हटैक आ सकता है।
डॉक्टरों का मानना है कि बदले वक्त के साथ हम लोगों के दिल इस लायक नहीं रह गए हैं कि वो एक दिन में इतनी इंसानियत बर्दाश्त कर सकें।

Tuesday, 6 December 2011

ye bhi hona hi tha....


अब फेसबुक और गूगल पर भी चलेगा सरकारी चाबुक?

टेलिकॉम मिनिस्टर कपिल सिब्बल ने साफ किया है कि इंटरनेट कंपनियों ने आपत्तिजनक कंटेंट पर रोक लगाने की सरकार की अपील अनसुनी कर दी है और इसलिए अब सरकार खुद इस दिशा में जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी जरूरी होगा किया जाएगा, लेकिन सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स और अन्य किसी भी प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट डाले जाने पर हर हाल में रोक लगाई जाएगी।
गौरतलब है कि सरकार ने गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट और याहू के अधिकारियों से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मोहम्मद पैगंबर से जुड़ी कथित अपमानजनक, गलत और भड़काने वाली सामग्रियों को हटाने के लिए कहा था। सरकार ने यह भी कहा था कि इन वेबसाइट्स के प्रबंधन ऐसी कोई व्यवस्था करें जिससे ऐसे कंटेंट यहां न डाले जा सकें।
मिली जानकारी के मुताबिक सिब्बल से मुलाकात करने वाले गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और याहू के अधिकारियों ने इस मामले में कोई वादा नहीं किया। इन अधिकारियों ने यह जरूर कहा कि अगर कोई खास शिकायत की जाती है तो वह उस पर ध्यान देंगे। लेकिन, आम तौर पर कंटेंट कंट्रोल की व्यवस्था वे नहीं कर सकते।
मंगलवार को सिब्बल के साथ इन इंटरनेट कंपनियों के अधिकारियों की बैठक की खबर मीडिया में आने के बाद सिब्बल भी मीडिया के सामने यह मसला ले आए। उन्होंने साफ किया सरकार न तो अभिव्यक्ति की आजादी में कोई खलल डालना चाहती है और न फेसबुक, गूगल वगैरह पर लगाम कसना चाहती है। उन्होंने कहा कि तीन महीने पहले सरकार की जानकारी में इंटरनेट की इन साइटों पर डाली गई ऐसी सामग्री पर गई जिसे कोई भी पहली नजर में आपत्तिजनक कहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी सामग्री धार्मिक शख्सियतों के खिलाफ भी थी। इसलिए इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स के अधिकारियों से संपर्क किया गया।
उन्होंने कहा कि पहले इन लोगों के ध्यान में वे मैटर लाकर इन्हें ही हल निकालने को कहा गया। मगर, इन्होंने कोई हल नहीं निकाला। इसलिए अब सरकार ही कोई हल निकालेगी। उन्होंने कहा कि सरकार क्या करेगी, इस बारे में वह फिलहाल कुछ नहीं कह सकते, लेकिन किसी भी हालत में ऐसे मैटर पब्लिक प्लेटफॉर्म पर डालने की इजाजत नहीं देगी।
फेसबुक ने भी रखा अपना पक्ष
सिब्बल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद फेसबुक ने कहा है कि इस मुद्दे पर वह सरकार का पक्ष समझता है और वह ऐसे सभी कंटेंट हटा देगा जो समझौते का उल्लंघन करते हैं। फेसबुक ने कहा आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर उसकी नीति पहले से ही लागू है। जो भी कंटेंट उसके प्लेटफॉर्म पर डाला जाता है उसमें कुछ भी आपत्तिजनक पाने पर उसे आपत्तिजनक करार दिया जा सकता है। यह काम कोई भी यूजर कर सकता है। जब कोई यूजर उसे आपत्तिजनक बताता है तब साइट से जुड़े कर्मचारी उस आपत्ति पर विचार करते हैं और सही पाए जाने पर उसे हटा देते हैं। फेसबुक ने कहा कि आगे भी इस तरह से आपत्तिजनक पाए जाने वाले कंटेंट को हटाना जारी रखा जाएगा।
थरूर ने बदला स्टैंड
इस बहस के शुरू होते ही इसके पक्ष और विपक्ष में लोगों का बोलना शुरू हो गया। पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने इस विवाद पर भी अपना स्टैड दो घंटे के अंदर बदल लिया। सिब्बल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरत बाद उन्होंने ट्वीट किया कि कपिल सिब्बल ने जो कुछ कहा है, उस बारे में कुछ भी कहने से पहले वह सिब्बल से बात करेंगे, लेकिन फिर भी उन्होंने इतना जरूर कहा कि 'मैं सेंसरशिप के खिलाफ हूं।' मगर, थोड़ी ही देर बाद थरूर ने दोबारा ट्वीट किया। अब उनका कहना था कि 'सिब्बल से बात करने के बाद स्थिति साफ हुई और मैं सिब्बल का पूरी तरह समर्थन करता हूं।'

Saturday, 3 December 2011

सदाबहार हीरो देवानंद नहीं रहे

dev-anand.jpgबॉलिवुड के सदाबहार ऐक्टर देवानंद नहीं रहे। देवानंद का निधन लंदन में हार्ट अटैक से हुआ। 

देवानंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को हुआ था। उनका पूरा नाम धर्म देव आनंद था। 88 साल के देवानंद अपने आखिरी दम तक बॉलिवुड में सक्रिय रहे। बतौर ऐक्टर ,प्रड्यूसर और डायरेक्टर उनकी आखिरी फिल्म ' चार्जशीट 'इसी साल रिलीज हुई थी। देवानंद को 2001 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और 2002 में उन्हें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड दिया गया। 

देवानंद ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1946 में आई फिल्म ' हम एक हैं ' से की। देवानंद ने अपने लंबे करियर के दौरान कई सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी फिल्म ' गाइड ' को हिंदी सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है। 

देवानंद का विवाह बॉलिवुड की ऐक्ट्रेस मोना सिंह उर्फ कल्पना कार्तिक से हुई थी। देवानंद के दोनों भाई चेतन आनंद और विजय आनंद भी बॉलिवुड के जाने-माने प्रड्यूसर-डायरेक्टर थे। 
[http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10976977.cms]

This is how software industry works...


इस बार दुनिया को मंदी से कोई नहीं बचा पाएगा

 युनाइटेड नेशंस ने चेतावनी दी है कि दुनिया एक बार फिर आर्थिक मंदी की ओर बढ़ रही है। युनाइटेड नेशंस का अनुमान है कि 2012 में ग्लोबल इकनॉमिक ग्रोथ और कम रहेगी और भारत व चीन जैसी तेजी से बढ़ती ताकतें भी इसे संभाल नहीं पाएंगी। गौरतलब है कि पिछली बार आर्थिक मंदी में चीन और भारत की वजह से ग्लोबल इकॉनमी को सहारा मिला था। 

'दुनिया की आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2012' पर युनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले साल ग्लोबल इकनॉमिक ग्रोथ रेट घटकर 2.6% रह जाएगी, जो 2010 में 4% थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2012 का साल ग्लोबल इकॉनमी के लिए 'करो या मरो' का होगा। 

युनाइटेड नेशंस ने कहा है कि ग्लोबल इकनॉमिक संकट के बाद दो साल में सुधार की गति काफी असमान रही है और दुनिया भर की इकॉनमी एक बार फिर से मंदी के मुहाने पर आ खड़ी हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि एक और आर्थिक मंदी का जोखिम बढ़ गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि खासकर यूरोप और अमेरिका के नीति निर्माताओं की असफलता की वजह से बेरोजगारी का संकट दूर नहीं हो सका है। साथ ही वे कर्ज संकट से निपट नहीं सके हैं और वित्तीय क्षेत्र की कमजोरी बढ़ने से ग्लोबल इकॉनमी के सामने 2012-13 में काफी जोखिम की स्थिति रहेगी। इसमें कहा गया है कि भारत और चीन जैसे विकासशील देशों की ग्रोथ रेट 2012 में घटकर 5 . 6 % रह जाएगी, जो 2010 में 7.5 % थी। अभी ये देश ग्लोबल इकॉनमी के इंजन बने हुए हैं। 

विकासशील देश विकसित देशों के संकट से और अधिक प्रभावित होंगे। इसमें कहा गया है कि चीन और भारत के ग्रोथ रेट घटेंगे पर बाकियों की तुलना में बेहतर रहेंगे। भारतीय इकॉनमी की वृद्धि दर 2012-13 में 7.7 से 7.9 % रहने की उम्मीद है, जो 2010 में 9 % रही थी। चीन की वृद्धि दर के 2011 में घटकर 9.3% और 2012-13 में 9 % पर आने का अनुमान लगाया गया है। 2010 में यह 10.4 प्रतिशत रही थी। 
[http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10954261.cms]

भाषण के दौरान पंखा गिरा, पवार बाल-बाल बचे

 कृषि मंत्री शरद पावर शनिवार को जवाहरलाल नेहरू ऐग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में उस समय बाल-बाल बच गए जब वह भाषण देने के लिए जा रहे थे। पवार जैसे ही भाषण देने के लिए उठे, तभी उनके ऊपर लगा सीलिंग फैन नीचे गिर गया। जवाहरलाल नेहरू ऐग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी में पंरपरागत खेती से हटकर नई खेती के संबंध में 3 दिन का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था और इसमें पवार मुख्य अतिथि के तौर पर वहां मौजूद थे। मंच पर केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री चरण दास महंत, केन्द्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री हरीश रावत, मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया और पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई भी मौजूद थे।

कार्यक्रम खत्म होने वाला था सिर्फ पवार का भाषण होना बाकी था। जैसे ही पवार भाषण देने के लिए आगे बढ़े, तभी उनके ऊपर लगा एक सीलिंग फैन अचानक गिर गया। इस घटना के बाद अफरातफरी मच गई और पवार के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया। हालांकि, इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ और पंखा हटाने के बाद पवार ने अपना भाषण शुरू कर दिया। 
(http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10969522.cms)