दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन इलाके में रहने वाले 26 वर्षीय सुमित मित्तल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि घर से निकलते ऑटो मिलना उसे इतना महंगा पड़ेगा। सुमित फिलहाल आईपी एक्सटेंशन के ही मैक्स अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।
फ़ेकिंग न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक सुमित नोएडा के सेक्टर 62 में टीसीएस कम्पनी में काम करता है। घर से ऑफिस तक के रास्ते में यूपी-दिल्ली बॉर्डर आने की वजह से उसे कभी सीधा ऑटो नहीं मिलता था। यही वजह थी कि दस बजे का ऑफिस होने के बावजूद वो हर रोज़ आठ बजे घर से निकलता था। घर से निकलने से पहले वो ऑटो वालों से चलने के लिए रिक्वेस्ट करने और पैसे कम करने के लिए खुद को मेंटली प्रिपेयर कर लेता था।
सोमवार सुबह भी ऐसी ही तैयारी के साथ वो घर से निकला। जैसे ही वो सोसाइटी से निकला उसे सामने वाली सड़क से गुज़र रहा एक ऑटो दिखाई दिया। उसने बड़े अनमने तरीके से ‘ओए ऑटो’ की आवाज़ लगाई और हाथ हिलाया।
ये देखकर सुमित हैरत में पड़ गया कि न सिर्फ वो ऑटो वाला रूका बल्कि घुमकर खुद सड़क क्रॉस कर उस तक आया। सुमित के लिए ये बहुत ही चौंकाने वाला था। अमूमन दस में से नौ ऑटो वाले इस तरह की आवाज़ों को अनसुना कर देते थे और जो सुनते थे वो ‘गैस भरवाने जा रहा हूं’ कहकर आगे बढ़ जाते थे। मगर ये पहला था जब आवाज़ देने पर एक ऑटो वाला न सिर्फ रूका बल्कि खुद उसकी तरफ भी आया। मगर सुमित को अब भी उसके चलने के लिए तैयार होने पर शक था। सुमित ने डरते-डरते पूछा, भइया नोएडा चलोगे। जिस पर ऑटो वाले ने पूछा-नोएडा में कंहा?
पिछले दो मिनट में सुमित को मिला ये दूसरा झटका था। पहले तो ऑटो वाला घूम कर आया और अब ये पूछ रहा है…नोएडा में कहां? इसका मतलब ये है कि वो चल सकता है। बिना वक्त गंवाए सुमित ने कहा-सेक्टर 62…ऑटो वाले ने सीट की तरफ इशारा करते हुए कहा-बैठो। इशारा देखकर सुमित की सांसें तेज़-तेज़ चलने लगी। मगर अब भी एक सवाल बाकी था-कितने पैसे लोगे? और इस पर जो ऑटो वाले ने कहा वो राजधानी बनने के सौ सालों के इतिहास में दिल्ली में पहली बार किसी ऑटो वाले ने कहा था-जितने बनते हैं दे देना!
इस पर सुमित ने 80 बोला और ऑटो वाला मान गया। बड़ी मुश्किल से सुमित ने खुद को सम्भाला और ऑटो में बैठ गया। ये खुशी वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। उसे ये सब एक सपने की तरह लग रहा था। हकीकत तो ये थी कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे घर से निकलते ही कभी सीधे ऑफिस जाने के लिए अस्सी रूपये में सीधा ऑटो मिल जाएगा।
तभी उसकी नज़र घड़ी पर पड़ी जिसमें आठ पांच हुए थे। उसके ज़हन में ख्याल आया कि टाइम से ऑफिस पहुंच गया तो रोज़ के मुकाबले घंटा पहले निकल लूंगा। शाम को टाइम से घर आ जाऊंगा। वो अपनी एक्साइटमेंट संभाल नहीं पा रहा था। उसकी हालत कौन बनेगा करोड़पति के उसे प्रतियोगी की तरह हो गई थी जो 80 हज़ार जीतने की सोच कर आया था और 50 लाख जीत चुका था।
दिमाग तरह-तरह के विचारों से भरता जा रहा था। जल्दी ऑफिस पहुंच जाऊंगा, जल्दी निकल लूंगा, शाम को कुछ काम निपटा दूंगा, डर्टी पिक्चर का ईवनिंग शो देखने चला जाऊंगा….इसी तरह की उसने एक-आध बात और सोची तो सांसें तेज़ चलने के साथ-साथ अब उसे पसीना आने लगा। देखते ही देखते उसकी हालत ख़राब होने लगी।
तभी ऑटो ड्राइवर ने सुमित की बिगड़ती हालत देखी तो उसे फौरन नज़दीक के अस्पताल ले गया। जहां वक्त रहते डॉक्टरों ने उसे उपचार देकर उसे बचा लिया। होश में आने पर जब सुमित से पूरी घटना का ब्यौरा सुनने के बाद डॉक्टर इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि वक्त पर ऑटो मिलने का ‘सदमा’ सुमित बर्दाश्त नहीं कर पाया और माइनर हार्ट अटैक का शिकार हो गया।
साथ ही डॉक्टरों ने घरवालों को हिदायत दी है कि सुमित को ये न बताएं कि ऑटो वाला ही उसे अस्पताल लाया था वरना ये सुनकर उसे फिर हार्ट हटैक आ सकता है।
डॉक्टरों का मानना है कि बदले वक्त के साथ हम लोगों के दिल इस लायक नहीं रह गए हैं कि वो एक दिन में इतनी इंसानियत बर्दाश्त कर सकें।

