Monday, 12 December 2011

घर से निकलते ही ऑटो मिलने पर युवक को पड़ा दिल का दौरा, नहीं झेल पाया सदमा

दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन इलाके में रहने वाले 26 वर्षीय सुमित मित्तल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि घर से निकलते ऑटो मिलना उसे इतना महंगा पड़ेगा। सुमित फिलहाल आईपी एक्सटेंशन के ही मैक्स अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।
फ़ेकिंग न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक सुमित नोएडा के सेक्टर 62 में टीसीएस कम्पनी में काम करता है। घर से ऑफिस तक के रास्ते में यूपी-दिल्ली बॉर्डर आने की वजह से उसे कभी सीधा ऑटो नहीं मिलता था। यही वजह थी कि दस बजे का ऑफिस होने के बावजूद वो हर रोज़ आठ बजे घर से निकलता था। घर से निकलने से पहले वो ऑटो वालों से चलने के लिए रिक्वेस्ट करने और पैसे कम करने के लिए खुद को मेंटली प्रिपेयर कर लेता था।
सोमवार सुबह भी ऐसी ही तैयारी के साथ वो घर से निकला। जैसे ही वो सोसाइटी से निकला उसे सामने वाली सड़क से गुज़र रहा एक ऑटो दिखाई दिया। उसने बड़े अनमने तरीके से ‘ओए ऑटो’ की आवाज़ लगाई और हाथ हिलाया।
ये देखकर सुमित हैरत में पड़ गया कि न सिर्फ वो ऑटो वाला रूका बल्कि घुमकर खुद सड़क क्रॉस कर उस तक आया। सुमित के लिए ये बहुत ही चौंकाने वाला था। अमूमन दस में से नौ ऑटो वाले इस तरह की आवाज़ों को अनसुना कर देते थे और जो सुनते थे वो ‘गैस भरवाने जा रहा हूं’ कहकर आगे बढ़ जाते थे। मगर ये पहला था जब आवाज़ देने पर एक ऑटो वाला न सिर्फ रूका बल्कि खुद उसकी तरफ भी आया। मगर सुमित को अब भी उसके चलने के लिए तैयार होने पर शक था। सुमित ने डरते-डरते पूछा, भइया नोएडा चलोगे। जिस पर ऑटो वाले ने पूछा-नोएडा में कंहा?
पिछले दो मिनट में सुमित को मिला ये दूसरा झटका था। पहले तो ऑटो वाला घूम कर आया और अब ये पूछ रहा है…नोएडा में कहां? इसका मतलब ये है कि वो चल सकता है। बिना वक्त गंवाए सुमित ने कहा-सेक्टर 62…ऑटो वाले ने सीट की तरफ इशारा करते हुए कहा-बैठो। इशारा देखकर सुमित की सांसें तेज़-तेज़ चलने लगी। मगर अब भी एक सवाल बाकी था-कितने पैसे लोगे? और इस पर जो ऑटो वाले ने कहा वो राजधानी बनने के सौ सालों के इतिहास में दिल्ली में पहली बार किसी ऑटो वाले ने कहा था-जितने बनते हैं दे देना!
इस पर सुमित ने 80 बोला और ऑटो वाला मान गया। बड़ी मुश्किल से सुमित ने खुद को सम्भाला और ऑटो में बैठ गया। ये खुशी वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। उसे ये सब एक सपने की तरह लग रहा था। हकीकत तो ये थी कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे घर से निकलते ही कभी सीधे ऑफिस जाने के लिए अस्सी रूपये में सीधा ऑटो मिल जाएगा।
तभी उसकी नज़र घड़ी पर पड़ी जिसमें आठ पांच हुए थे। उसके ज़हन में ख्याल आया कि टाइम से ऑफिस पहुंच गया तो रोज़ के मुकाबले घंटा पहले निकल लूंगा। शाम को टाइम से घर आ जाऊंगा। वो अपनी एक्साइटमेंट संभाल नहीं पा रहा था। उसकी हालत कौन बनेगा करोड़पति के उसे प्रतियोगी की तरह हो गई थी जो 80 हज़ार जीतने की सोच कर आया था और 50 लाख जीत चुका था।
दिमाग तरह-तरह के विचारों से भरता जा रहा था। जल्दी ऑफिस पहुंच जाऊंगा, जल्दी निकल लूंगा, शाम को कुछ काम निपटा दूंगा, डर्टी पिक्चर का ईवनिंग शो देखने चला जाऊंगा….इसी तरह की उसने एक-आध बात और सोची तो सांसें तेज़ चलने के साथ-साथ अब उसे पसीना आने लगा। देखते ही देखते उसकी हालत ख़राब होने लगी।
तभी ऑटो ड्राइवर ने सुमित की बिगड़ती हालत देखी तो उसे फौरन नज़दीक के अस्पताल ले गया। जहां वक्त रहते डॉक्टरों ने उसे उपचार देकर उसे बचा लिया। होश में आने पर जब सुमित से पूरी घटना का ब्यौरा सुनने के बाद डॉक्टर इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि वक्त पर ऑटो मिलने का ‘सदमा’ सुमित बर्दाश्त नहीं कर पाया और माइनर हार्ट अटैक का शिकार हो गया।
साथ ही डॉक्टरों ने घरवालों को हिदायत दी है कि सुमित को ये न बताएं कि ऑटो वाला ही उसे अस्पताल लाया था वरना ये सुनकर उसे फिर हार्ट हटैक आ सकता है।
डॉक्टरों का मानना है कि बदले वक्त के साथ हम लोगों के दिल इस लायक नहीं रह गए हैं कि वो एक दिन में इतनी इंसानियत बर्दाश्त कर सकें।

Tuesday, 6 December 2011

ye bhi hona hi tha....


अब फेसबुक और गूगल पर भी चलेगा सरकारी चाबुक?

टेलिकॉम मिनिस्टर कपिल सिब्बल ने साफ किया है कि इंटरनेट कंपनियों ने आपत्तिजनक कंटेंट पर रोक लगाने की सरकार की अपील अनसुनी कर दी है और इसलिए अब सरकार खुद इस दिशा में जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी जरूरी होगा किया जाएगा, लेकिन सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स और अन्य किसी भी प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट डाले जाने पर हर हाल में रोक लगाई जाएगी।
गौरतलब है कि सरकार ने गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट और याहू के अधिकारियों से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मोहम्मद पैगंबर से जुड़ी कथित अपमानजनक, गलत और भड़काने वाली सामग्रियों को हटाने के लिए कहा था। सरकार ने यह भी कहा था कि इन वेबसाइट्स के प्रबंधन ऐसी कोई व्यवस्था करें जिससे ऐसे कंटेंट यहां न डाले जा सकें।
मिली जानकारी के मुताबिक सिब्बल से मुलाकात करने वाले गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और याहू के अधिकारियों ने इस मामले में कोई वादा नहीं किया। इन अधिकारियों ने यह जरूर कहा कि अगर कोई खास शिकायत की जाती है तो वह उस पर ध्यान देंगे। लेकिन, आम तौर पर कंटेंट कंट्रोल की व्यवस्था वे नहीं कर सकते।
मंगलवार को सिब्बल के साथ इन इंटरनेट कंपनियों के अधिकारियों की बैठक की खबर मीडिया में आने के बाद सिब्बल भी मीडिया के सामने यह मसला ले आए। उन्होंने साफ किया सरकार न तो अभिव्यक्ति की आजादी में कोई खलल डालना चाहती है और न फेसबुक, गूगल वगैरह पर लगाम कसना चाहती है। उन्होंने कहा कि तीन महीने पहले सरकार की जानकारी में इंटरनेट की इन साइटों पर डाली गई ऐसी सामग्री पर गई जिसे कोई भी पहली नजर में आपत्तिजनक कहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी सामग्री धार्मिक शख्सियतों के खिलाफ भी थी। इसलिए इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स के अधिकारियों से संपर्क किया गया।
उन्होंने कहा कि पहले इन लोगों के ध्यान में वे मैटर लाकर इन्हें ही हल निकालने को कहा गया। मगर, इन्होंने कोई हल नहीं निकाला। इसलिए अब सरकार ही कोई हल निकालेगी। उन्होंने कहा कि सरकार क्या करेगी, इस बारे में वह फिलहाल कुछ नहीं कह सकते, लेकिन किसी भी हालत में ऐसे मैटर पब्लिक प्लेटफॉर्म पर डालने की इजाजत नहीं देगी।
फेसबुक ने भी रखा अपना पक्ष
सिब्बल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद फेसबुक ने कहा है कि इस मुद्दे पर वह सरकार का पक्ष समझता है और वह ऐसे सभी कंटेंट हटा देगा जो समझौते का उल्लंघन करते हैं। फेसबुक ने कहा आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर उसकी नीति पहले से ही लागू है। जो भी कंटेंट उसके प्लेटफॉर्म पर डाला जाता है उसमें कुछ भी आपत्तिजनक पाने पर उसे आपत्तिजनक करार दिया जा सकता है। यह काम कोई भी यूजर कर सकता है। जब कोई यूजर उसे आपत्तिजनक बताता है तब साइट से जुड़े कर्मचारी उस आपत्ति पर विचार करते हैं और सही पाए जाने पर उसे हटा देते हैं। फेसबुक ने कहा कि आगे भी इस तरह से आपत्तिजनक पाए जाने वाले कंटेंट को हटाना जारी रखा जाएगा।
थरूर ने बदला स्टैंड
इस बहस के शुरू होते ही इसके पक्ष और विपक्ष में लोगों का बोलना शुरू हो गया। पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने इस विवाद पर भी अपना स्टैड दो घंटे के अंदर बदल लिया। सिब्बल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरत बाद उन्होंने ट्वीट किया कि कपिल सिब्बल ने जो कुछ कहा है, उस बारे में कुछ भी कहने से पहले वह सिब्बल से बात करेंगे, लेकिन फिर भी उन्होंने इतना जरूर कहा कि 'मैं सेंसरशिप के खिलाफ हूं।' मगर, थोड़ी ही देर बाद थरूर ने दोबारा ट्वीट किया। अब उनका कहना था कि 'सिब्बल से बात करने के बाद स्थिति साफ हुई और मैं सिब्बल का पूरी तरह समर्थन करता हूं।'

Saturday, 3 December 2011

सदाबहार हीरो देवानंद नहीं रहे

dev-anand.jpgबॉलिवुड के सदाबहार ऐक्टर देवानंद नहीं रहे। देवानंद का निधन लंदन में हार्ट अटैक से हुआ। 

देवानंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को हुआ था। उनका पूरा नाम धर्म देव आनंद था। 88 साल के देवानंद अपने आखिरी दम तक बॉलिवुड में सक्रिय रहे। बतौर ऐक्टर ,प्रड्यूसर और डायरेक्टर उनकी आखिरी फिल्म ' चार्जशीट 'इसी साल रिलीज हुई थी। देवानंद को 2001 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और 2002 में उन्हें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड दिया गया। 

देवानंद ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1946 में आई फिल्म ' हम एक हैं ' से की। देवानंद ने अपने लंबे करियर के दौरान कई सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी फिल्म ' गाइड ' को हिंदी सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है। 

देवानंद का विवाह बॉलिवुड की ऐक्ट्रेस मोना सिंह उर्फ कल्पना कार्तिक से हुई थी। देवानंद के दोनों भाई चेतन आनंद और विजय आनंद भी बॉलिवुड के जाने-माने प्रड्यूसर-डायरेक्टर थे। 
[http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10976977.cms]

This is how software industry works...


इस बार दुनिया को मंदी से कोई नहीं बचा पाएगा

 युनाइटेड नेशंस ने चेतावनी दी है कि दुनिया एक बार फिर आर्थिक मंदी की ओर बढ़ रही है। युनाइटेड नेशंस का अनुमान है कि 2012 में ग्लोबल इकनॉमिक ग्रोथ और कम रहेगी और भारत व चीन जैसी तेजी से बढ़ती ताकतें भी इसे संभाल नहीं पाएंगी। गौरतलब है कि पिछली बार आर्थिक मंदी में चीन और भारत की वजह से ग्लोबल इकॉनमी को सहारा मिला था। 

'दुनिया की आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2012' पर युनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले साल ग्लोबल इकनॉमिक ग्रोथ रेट घटकर 2.6% रह जाएगी, जो 2010 में 4% थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2012 का साल ग्लोबल इकॉनमी के लिए 'करो या मरो' का होगा। 

युनाइटेड नेशंस ने कहा है कि ग्लोबल इकनॉमिक संकट के बाद दो साल में सुधार की गति काफी असमान रही है और दुनिया भर की इकॉनमी एक बार फिर से मंदी के मुहाने पर आ खड़ी हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि एक और आर्थिक मंदी का जोखिम बढ़ गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि खासकर यूरोप और अमेरिका के नीति निर्माताओं की असफलता की वजह से बेरोजगारी का संकट दूर नहीं हो सका है। साथ ही वे कर्ज संकट से निपट नहीं सके हैं और वित्तीय क्षेत्र की कमजोरी बढ़ने से ग्लोबल इकॉनमी के सामने 2012-13 में काफी जोखिम की स्थिति रहेगी। इसमें कहा गया है कि भारत और चीन जैसे विकासशील देशों की ग्रोथ रेट 2012 में घटकर 5 . 6 % रह जाएगी, जो 2010 में 7.5 % थी। अभी ये देश ग्लोबल इकॉनमी के इंजन बने हुए हैं। 

विकासशील देश विकसित देशों के संकट से और अधिक प्रभावित होंगे। इसमें कहा गया है कि चीन और भारत के ग्रोथ रेट घटेंगे पर बाकियों की तुलना में बेहतर रहेंगे। भारतीय इकॉनमी की वृद्धि दर 2012-13 में 7.7 से 7.9 % रहने की उम्मीद है, जो 2010 में 9 % रही थी। चीन की वृद्धि दर के 2011 में घटकर 9.3% और 2012-13 में 9 % पर आने का अनुमान लगाया गया है। 2010 में यह 10.4 प्रतिशत रही थी। 
[http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10954261.cms]

भाषण के दौरान पंखा गिरा, पवार बाल-बाल बचे

 कृषि मंत्री शरद पावर शनिवार को जवाहरलाल नेहरू ऐग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में उस समय बाल-बाल बच गए जब वह भाषण देने के लिए जा रहे थे। पवार जैसे ही भाषण देने के लिए उठे, तभी उनके ऊपर लगा सीलिंग फैन नीचे गिर गया। जवाहरलाल नेहरू ऐग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी में पंरपरागत खेती से हटकर नई खेती के संबंध में 3 दिन का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था और इसमें पवार मुख्य अतिथि के तौर पर वहां मौजूद थे। मंच पर केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री चरण दास महंत, केन्द्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री हरीश रावत, मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया और पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई भी मौजूद थे।

कार्यक्रम खत्म होने वाला था सिर्फ पवार का भाषण होना बाकी था। जैसे ही पवार भाषण देने के लिए आगे बढ़े, तभी उनके ऊपर लगा एक सीलिंग फैन अचानक गिर गया। इस घटना के बाद अफरातफरी मच गई और पवार के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया। हालांकि, इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ और पंखा हटाने के बाद पवार ने अपना भाषण शुरू कर दिया। 
(http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10969522.cms)

Friday, 2 December 2011

What an idea sir jee .....

snakes-in-office.jpgउत्तर प्रदेश में बस्ती जिले की हर्रैया तहसील में एक सपेरे ने 40 से ज्यादा सांप छोड़ दिए। घूस की मांग से परेशान हक्कुल नाम के सपेरे ने तहसील के ऑफिस में सांपों से भरे 3 बैग खाली कर दिए। 

इन सांपों में कुछ बेहद जहरीले कोबरा भी थे। सांपों को देख कर ऑफिस में अफरा-तफरी मच गई। कोई भागा, तो कोई मेज-कुर्सियों पर खड़ा हो गया। बड़ी मशक्कत के बाद सांपों को हटाया जा सका। 

दरअसल हक्कुल स्थानीय स्तर पर प्रसिद्ध सपेरे हैं और सांप निकलने पर उन्हें बुलाया जाता है। हक्कुल ने सांपों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार से जमीन की मांग की थी लेकिन हक्कुल को केवल आश्वासन मिले। 

हक्कुल के मुताबिक सरकार ने पिछले साल जिला प्रशासन को उसे पट्टे पर जमीन देने के आदेश जारी किए थे लेकिन रिश्वत नहीं मिलने के कारण लेखपाल समेत तहसील के कुछ और अधिकारी अड़ंगा डाल रहे थे। इसी बात से नाराज होकर उसने तहसील में सांप छोड़ दिए। 

उप जिलाधिकारी रणविजय सिंह ने बताया कि घटना को संज्ञान में लिया गया है और हक्कुल को जल्द ही जमीन का पट्टा दे दिया जाएगा।
(http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10944600.cms)

Thursday, 1 December 2011

Random number generation algorithm


Global rally lifts Sensex 360 pts at close

Global rally lifts Sensex 360 pts at close; BHEL loses 2.5%The Sensex surged 2% at close on Thursday. It saw some profit taking in the second half of trade. Central banks' move to reduce the cost of dollar pushed all the global markets higher, by 2-6%.
Sharp appreciation in the rupee too helped our markets coupled with short covering. The Sensex, which shot up nearly 600 points in intraday trade, ended up 359.99 points at 16,483.45. The Niftyrose 104.80 points, to close at 4,936.85, after hitting a high of 5,010 during the day.
Gerard Lyons, the global head of strategy and economics at Standard Chartered says the move by central banks last night and the cut in reserve ratio by China really helped make the dollar easier to access and increase dollar liquidity in the system.
The central banks of Canada, Japan and Switzerland along with the ECB, US Federal Reserve and Bank of England reduced the cost of dollar temporarily by 50 basis points. China cut reserve requirement ratio for banks by 50 bps - first time in nearly three years on Wednesday.
 
However, Peter Hooper, managing director and chief economist at Deutsche Bank says, he doesn’t think this move itself is going to be a game changer for the eurozone crisis. “I think the actions by the central banks help to reduce the stress near-term, but by themselves they are not going to change the game,” he said.
European Central Bank's chief also warned that downside risks to economy outlook have increased.
European markets were mixed, at the time of closing of Indian equities.
Back home, Vikas Khemani, executive vice president & head - institutional equities of Edelweiss Securities says, the rally may not sustain. “I think markets are going to see a big reversal from hereon. For India, the problem is a lot more domestic than only global.” According to him, fundamental problems still need to be addressed.
Appreciation in the rupee was quite sharp. It gained 74 paise at 51.45 to the dollar. SEBI's debt auction on Wednesday received good response from foreign investors, which raised hopes of dollar inflow.
Meanwhile, inflation has started declining. Primary articles inflation for the week ended on November 19 dropped to 7.74% versus 9.08% in previous week. During the same period, food articles inflation fell to 8% versus 9.01%. Finance Minister Pranab Mukherjee feels March inflation could be 6-7%, if current decline continues.
All the sectoral indices closed in a positive terrain barring pharma. The BSE Metal, Bank and Realty indices jumped 3.5-4%.
Shares of ICICI Bank, Tata Motors, Hindalco, Sterlite and SAIL topped the buying list throughout the session, shot up 6-7%.
Among the auto stocks, after their sales numbers for November, M&M was up 0.8% while Maruti lost 0.7%. Hero Motocorp gained 4.3% and Bajaj Auto rose 1.8% ahead of numbers.
Index heavyweights Reliance Industries, Infosys, HDFC, SBI, L&T and TCS moved up 2-3%.
However, major largecaps like Bharti Airtel and BHEL lost 2% on profit booking. Dr Reddy's Labs fell 2% after CBI issued notice to company's MD, pertaining to Chandrababu Naidu assets case.
BPCL dropped 2% after oil marketing companies cut petrol rates by Rs 0.78/litre. Sun Pharma and HUL too were under pressure.
Advancing outnumbered declining ones by 1725 to 1118 on BSE.

सेवा नहीं, मेवा के लिए आएंगी विदेशी कंपनियां: अन्ना

समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा है कि रीटेल सेक्टर में एफडीआई देश के लिए सही नहीं है। उन्होंने कहा है कि विदेशी कंपनियों की नीयत में खोट है और वे यहां पर सेवा के लिए नहीं बल्कि मेवा खाने के लिए आ रही हैं। अन्ना ने कहा कि एफडीआई देश को गुलामी के रास्ते पर ले जाएगी। उन्होंने पूछा, 'अंग्रेज हमारे वहां व्यापार करने आए थे। उन्होंने हम 150 साल शासन किया। क्या आप उसी को दोहराना चाहते हैं?' 

बातचीत में जब उनसे रीटेल सेक्टर में एफडीआई पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सरकार को जनभावनाओं का खयाल करना चाहिए। विदेशी कंपनियों की नीयत साफ नहीं है। वे यहां पर आएंगी और यहां की बिजली और पानी को बर्बाद करेंगी। 

' एफडीआई खतरनाक, तो चीन ने क्यों दी इजाजत ' 
रीटेल में एफडीआई पर बुधवार को भी सरकार और विपक्ष में गतिरोध बना रहा। सातवें दिन भी संसद नहीं चली। सरकार और विपक्ष अपने-अपने स्टैंड पर कायम हैं। बीजेपी ने इसे देश के लिए खतरा बताया तो कांग्रेस का कहना है कि अगर एफडीआई खतरनाक है, चीन ने इसे क्यों अपनाया ? 

पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा है कि एफडीआई पर विपक्ष का विरोध सही नहीं है। उन्होंने वामपंथी पार्टियों से पूछा कि अगर रीटेल में एफडीआई गलत है, तो चीन, वियतनाम और क्यूबा ने इसको क्यों अपनाया। उसने कहा है कि इससे कोई बेरोजगारी नहीं बढ़ेगी। 

देश के लिए खतरा है रीटेल में एफडीआई: बीजेपी 
बीजेपी ने कहा है कि रीटेल में एफडीआई देश के लिए खतरा है। उसने आरोप लगाया कि सरकार ने यह फैसला अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के दबाव में किया है। 

बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा, 'मल्टी ब्रैंड रीटेल में एफडीआई देश के लिए खतरा है। इसका सभी विपक्षी दलों और सरकार में शामिल कुछ पार्टियों तक ने विरोध किया। है। लेकिन सरकार ने देशहित के खिलाफ एकतरफा ढंग से संसद सत्र के दौरान यह निर्णय किया गया है।' जोशी ने कहा कि सरकार ने यह फैसला अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के दबाव में किया है और भारत के नागरिकों के हितों के साथ समझौता किया गया है। ऐसी भी खबरें आई हैं कि इन वैश्विक रीटेल कंपनियों इसके लिए काफी लॉबिंग की है और इसके लिए पैसा दिया है। उन्होंने कहा कि मल्टी ब्रैंड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर पूरा बैन होना चाहिए। 

कांग्रेस कोर कमिटी में नहीं हो सका फैसला 
मल्टी ब्रैंड रीटेल में एफडीआई पर जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए कांग्रेस ने बुधवार को एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, लेकिन यह खत्म होता नजर नहीं आ रहा। प्रधानमंत्री निवास पर कांग्रेस कोर कमिटी की मीटिंग भी बेनतीजा समाप्त हो गई। इसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के अलावा प्रणब मुखर्जी, अहमद पटेल, ए.के. एंटनी और आनंद शर्मा मौजूद थे। 

इससे पहले पार्टी में जारी घमासान को थामने के लिए प्रणब मुखर्जी ने रीटेल में एफडीआई और मुद्रास्फीति व काले धन पर काबू पाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर पार्टी के सांसदों को जानकारी दी। उन्होंने कांग्रेस सांसदों से कहा कि मल्टी ब्रैंड रीटेल में 51% एफडीआई की इजाजत से मुद्रास्फीति पर काबू पाने और खेत से लेकर खुदरा कीमतों में अंत को पाटने में मदद मिलेगी। 

मुखर्जी के बाद वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा गुरुवार को पार्टी के सांसदों को रीटेल में एफडीआई मुद्दे पर विस्तार से जानकारी देंगे। मुखर्जी ने सांसदों को बताया कि खुदरा में एफडीआई एक ऐसा कदम है जो कीमतों को घटाने में मदद करेगा। इससे चीजों के खेत में दाम और इसके थोक व खुदरा दामों में भारी अंतर को दूर करने में मदद मिलेगी।
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10929164.cms

Beware of such emails....

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Wednesday, 30 November 2011

Aur kuchh baaki hai....


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China manufacturing slowing, data show


HONG KONG (MarketWatch) — Rival manufacturing surveys released Thursday confirmed manufacturing activity in China slipped into contraction in November, with the grim conditions now seen as pushing Beijing towards monetary-policy easing to support growth.
The state-sponsored China Federation of Logistics & Planning reported its manufacturing Purchasing Managers’ Index fell to 49.0 on a 100 point scale, falling below the previous month’s 50.4 reading.
The result missed a 49.7 forecast from a Dow Jones Newswires survey.
Meanwhile, HSBC’s privately compiled China PMI dropped to 47.7, weaker than its initial reading of 48 released late last month, and indicating a deterioration of conditions from October’s reading of 51.
Analysts at IHS Global described the official PMI pointing to contraction as “shocking,” while HSBC’s economists described their own China PMI as indicating a “sharp deterioration” in business conditions.

Both survey results printed below the key 50 level that separates contraction from expansion, with HSBC’s result the weakest since March 2009, while the CFLP’s PMI was negative for the first time since February 2009.
Manufacturing output and new business orders were down sharply, while both input and output prices were falling at their fastest pace since March 2009, HSBC’s survey found.

Optimism check

IHS Global Insights China analyst Alistair Thornton said the result showed the Chinese economy was slowing much faster than had been expected, and that the cooling would be seen in weaker industrial production figures for November and slowing gross domestic product growth in the fourth quarter.
“This should provide a check on yesterday’s unbridled optimism in global markets,” Thornton said.
He linked the downbeat PMI reading to the central bank’s easing of required reserves for major lenders late Wednesday, saying: “The government has stepped into the ring. The loosening campaign has begun.”
HSBC economist Hongbin Qu also saw the data suggesting a reversal in Chinese policy, saying: “Growth is set to overtake inflation as Beijing’s top policy concern. This is likely to invite an across-the-board policy easing, which is likely to come as early as year-end.”
However, the HSBC survey did have a few bright spots, with new export business received by manufacturers picking up in November, while overall employment numbers rose fractionally. 
Chris Oliver is MarketWatch's Asia bureau chief, based in Hong Kong.http://www.marketwatch.com/story/china-manufacturing-slowing-data-show-2011-11-30?link=MW_latest_news