कुछ महीने पहले मुंबई के सुनील उल्लाल उस वक्त चौंक गए, जब एक दोस्त ने उन्हें एक महंगी पेंटिंग गिफ्ट की और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट ने उन्हें बताया कि उन्हें इस पर टैक्स चुकाना होगा। 63 साल के उल्लाल ने कहा, 'पेंटिंग काफी मशहूर आर्टिस्ट की थी और उसकी मौजूदा वैल्यू करीब एक लाख रुपए है। मेरे दोस्त ने इसे मुझे इसलिए गिफ्ट किया क्योंकि उसे लगा कि मुझे यह अच्छी लगी है, लेकिन मुझे इस बारे में बिलकुल पता नहीं था कि मुझे इस पर टैक्स चुकाना होगा।'
आयकर अधिनियम (साथ ही डायरेक्ट टैक्सेज कोड, जिसके अगले साल 1 अप्रैल से लागू होने की संभावना है) के मुताबिक अगर आपको कोई ऐसा उपहार मिलता है, जिसकी वैल्यू 50,000 रुपए से ज्यादा है, तो इसको आपकी आमदनी में शामिल किया जाएगा और आपको इस पर टैक्स देना होगा। यह नियम आपको एक वित्त वर्ष में मिलने वाले सभी उपहारों की कुल वैल्यू पर भी लागू होता है। मुंबई के एडी ऐंड कंपनी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के सीनियर पार्टनर आनंद टिबड़ेवाल के मुताबिक, 'अगर आपके उपहारों की कुल वैल्यू 50,000 रुपए से ज्यादा है, तो आपको इस पूरी रकम पर टैक्स देना होगा, न कि 50,000 के ऊपर वाली रकम पर।'
मुंबई के ठक्कर कंसल्टेंट्स के निदेशक मनीष ठक्कर के मुताबिक, 'यह नियम उन मामलों में भी लागू होता है जिनमें आपने किसी से कोई उत्पाद इसकी उचित वैल्यू के मुकाबले काफी कम कीमत पर खरीदा हो।' मिसाल के तौर पर, अगर किसी कार की डेप्रेशिएटेड वैल्यू 4.5 लाख रुपए है, लेकिन आपने इसे 3 लाख रुपए में खरीदा है तो बचे हुए 1.5 लाख रुपए को गिफ्ट के तौर पर देखा जाएगा और इसे आपकी आमदनी में शामिल कर लिया जाएगा। हालांकि अगर आप 4.1 लाख रुपए चुकाते हैं तो आपको कोई कर नहीं देना पड़ेगा क्योंकि उपहार की वैल्यू इस दशा में 50,000 रुपए से कम होगी।
किसी उपहार की उचित बाजार वैल्यू वह कीमत होती है, जो तब निकल कर आती है अगर उस उपहार को खुले बाजार में वैल्यूअर की तय की गई तारीख को बेचा जाए। रीयल एस्टेट के लिए स्टैंप ड्यूटी को बाजार वैल्यू के तौर पर माना जाता है।
खास रिश्तेदारों के दिए गए उपहारों को टैक्स से छूट है, इसमें किसी वैल्यू को नहीं देखा जाता है। इस तरह के रिश्तेदारों में जीवनसाथी, भाई-बहन, माता-पिता या जीवनसाधी के भाई और बहनें, दादा-दादी और पौत्र और उनके जीवनसाथी शामिल होते हैं। साथ ही, अगर प्रॉपर्टी किसी इच्छापत्र के जरिए आपको वसीयत की गई है, मान लीजिए कि आपकी शादी के मौके पर दी गई है, या इसे किसी स्थानीय संस्थान या प्राधिकरण ने गिफ्ट के तौर पर आपको दिया है तो आपको इस पर कोई कर नहीं चुकाना होगा।
डेलॉयट हासकिंस के पार्टनर होमी मिस्त्री के मुताबिक, 'मृत्यु के विचार से दानदाता की गिफ्ट की गई संपत्ति को भी अपवाद के तौर पर रखा गया है। अगर कोई शख्स जानता है कि वह अगले कुछ दिनों में मरने वाला है और अपनी संपत्तियां किसी शख्स को गिफ्ट के तौर पर दे देता है तो इस तरह की संपत्तियों को हासिल करने वाले को कोई कर नहीं देना होगा।'
(http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10877931.cms)
आयकर अधिनियम (साथ ही डायरेक्ट टैक्सेज कोड, जिसके अगले साल 1 अप्रैल से लागू होने की संभावना है) के मुताबिक अगर आपको कोई ऐसा उपहार मिलता है, जिसकी वैल्यू 50,000 रुपए से ज्यादा है, तो इसको आपकी आमदनी में शामिल किया जाएगा और आपको इस पर टैक्स देना होगा। यह नियम आपको एक वित्त वर्ष में मिलने वाले सभी उपहारों की कुल वैल्यू पर भी लागू होता है। मुंबई के एडी ऐंड कंपनी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के सीनियर पार्टनर आनंद टिबड़ेवाल के मुताबिक, 'अगर आपके उपहारों की कुल वैल्यू 50,000 रुपए से ज्यादा है, तो आपको इस पूरी रकम पर टैक्स देना होगा, न कि 50,000 के ऊपर वाली रकम पर।'
मुंबई के ठक्कर कंसल्टेंट्स के निदेशक मनीष ठक्कर के मुताबिक, 'यह नियम उन मामलों में भी लागू होता है जिनमें आपने किसी से कोई उत्पाद इसकी उचित वैल्यू के मुकाबले काफी कम कीमत पर खरीदा हो।' मिसाल के तौर पर, अगर किसी कार की डेप्रेशिएटेड वैल्यू 4.5 लाख रुपए है, लेकिन आपने इसे 3 लाख रुपए में खरीदा है तो बचे हुए 1.5 लाख रुपए को गिफ्ट के तौर पर देखा जाएगा और इसे आपकी आमदनी में शामिल कर लिया जाएगा। हालांकि अगर आप 4.1 लाख रुपए चुकाते हैं तो आपको कोई कर नहीं देना पड़ेगा क्योंकि उपहार की वैल्यू इस दशा में 50,000 रुपए से कम होगी।
किसी उपहार की उचित बाजार वैल्यू वह कीमत होती है, जो तब निकल कर आती है अगर उस उपहार को खुले बाजार में वैल्यूअर की तय की गई तारीख को बेचा जाए। रीयल एस्टेट के लिए स्टैंप ड्यूटी को बाजार वैल्यू के तौर पर माना जाता है।
खास रिश्तेदारों के दिए गए उपहारों को टैक्स से छूट है, इसमें किसी वैल्यू को नहीं देखा जाता है। इस तरह के रिश्तेदारों में जीवनसाथी, भाई-बहन, माता-पिता या जीवनसाधी के भाई और बहनें, दादा-दादी और पौत्र और उनके जीवनसाथी शामिल होते हैं। साथ ही, अगर प्रॉपर्टी किसी इच्छापत्र के जरिए आपको वसीयत की गई है, मान लीजिए कि आपकी शादी के मौके पर दी गई है, या इसे किसी स्थानीय संस्थान या प्राधिकरण ने गिफ्ट के तौर पर आपको दिया है तो आपको इस पर कोई कर नहीं चुकाना होगा।
डेलॉयट हासकिंस के पार्टनर होमी मिस्त्री के मुताबिक, 'मृत्यु के विचार से दानदाता की गिफ्ट की गई संपत्ति को भी अपवाद के तौर पर रखा गया है। अगर कोई शख्स जानता है कि वह अगले कुछ दिनों में मरने वाला है और अपनी संपत्तियां किसी शख्स को गिफ्ट के तौर पर दे देता है तो इस तरह की संपत्तियों को हासिल करने वाले को कोई कर नहीं देना होगा।'
(http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10877931.cms)
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